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ए. रामाचंद्रन की पेंटिंग ययाति |
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कला जीवन को फिर से लिखने का एक माध्यम है, एक ऐसी भाषा में जो प्रतिकात्मक
है, और जीवन को देखने की अलग दृष्टि देती है। कला एक तरह से दृष्टि का विस्तार है,
अनुभूति की बहुलता है। यह अनुभूति की बहुलता व्यक्ति सापेक्ष होती है। कलाकार की
और दर्शक की अनुभूति एक ही हो, यह जरुरी नहीं है। इसीलिए कला में जीवन को लिखना एक
तरह से लोकतांत्रिक दृष्टि का विस्तार है जो दर्शक को भी उतनी ही स्वतंत्रता देती
है, जितनी स्वतंत्रता कलाकार को होती है। इसीलिए कला केवल सृजन करना नहीं, बल्कि पुनर्व्याख्या करना है—जो कुछ जिया गया है, और उस जिये गये को भौतिक व
मानसिक स्तर पर जिस-जिस प्रकार से अनुभव किया गया है, उसे एक नया रूप देना है।
जीवन, अपने कच्चे रूप में, अक्सर बिना किसी संपादन के हमारे सामने आता है। वह
उथल-पुथल, अनिश्चितता और ऐसे पलों से भरा होता है जिन्हें समझना मुश्किल होता है। कला एक
शांत, फिर भी शक्तिशाली शक्ति के रूप में सामने आती है, जो हमें इन पलों को संशोधित
करने, उन्हें कोई अर्थ देने और उन्हें ऐसी कहानियों में बदलने का अवसर देती है जिनके
साथ हम जी सकें।
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| अतुल डोडिया की एक पेंटिंग |
इस संदर्भ में हमें पहले से हो चुकी कला के अनेक उदाहरण मिल जाएंगे, जैसे
पिकासो की गुएर्निका। भारतीय कला में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं। ए रामाचंद्रन की
ययाति, तैयब मेहता की सेलिब्रेशन, एमएफ हुसेन की कई रचनाएँ के साथ ही बिकास
भट्टाचार्यजी, गणेश पाइन, सोमनाथ होर,
चित्तोप्रसाद, हक्कू शाह, अमित अम्बालाल, केजी सुब्रमण्यन, सुधीर पटवर्धन, अतुल
डोडिया सहित कितने की कलाकार हैं जिनकी रचनाओं में हमें अपने जिये गये जीवन के
अनेक अनुभव याद आते रहते हैं। इन कलाकारों के साथ ही दूसरे कलाकारों की रचनाओं को
देखते समय हम जीवन को अलग तरह से देखने और पढ़ने लगते हैं। यही कला की विशेषता है,
कि वह हमें देखे हुए को नयी तरह से देखना सिखाती है, और कलाकार को उसे अलग तरह से
लिखने की शक्ति देती है।
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| गणेश पाइन की पेंटिंग |
कला के माध्यम से जीवन को फिर से लिखना, अपने जीवन की बागडोर (रचयिता
होने का अधिकार) वापस अपने हाथों में लेना है। मनुष्य लगातार परिस्थितियों द्वारा
गढ़ा जाता है—लाभ और हानि, खुशी, संघर्ष और बदलाव द्वारा। ये अनुभव हमें अक्सर ऐसा महसूस कराते हैं, मानो हम किसी ऐसी कहानी के पात्र मात्र हैं जिसे हमने खुद नहीं चुना है।
जीवन
का चुनाव जीव के नियंत्रण में नहीं है, वह विभिन्न परिस्थितियों में, ज्ञात-अज्ञात
शक्तियों द्वारा निरयंत्रित होता है। एक कलाकार इस नियंत्रण को चुनौती देता है,
जीवन को अलग तरह से देखने और अभिव्यक्त करने के माध्यम से। चित्रकला, लेखन, संगीत, नृत्य या किसी भी रचनात्मक कार्य के माध्यम से, हम अपनी कहानी को फिर से लिखना शुरू करते हैं। एक दर्दनाक याद कविता बन जाती
है; एक क्षणिक भावना मधुर धुन बन जाती है; एक बिखरी हुई पहचान एक
सुसंगत कहानी का रूप ले लेती है। इस प्रक्रिया में, हम अब केवल अनुभवों के विषय
मात्र नहीं रह जाते—बल्कि हम उन अनुभवों के व्याख्याकार बन जाते हैं।
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| एमएफ हुसेन की पेंटिंग ग्राम यात्रा |
कला बहुआयामी होने की गुंजाइश भी देती है। किसी एक घटना के कई अर्थ हो सकते
हैं, और कला हमें उन सभी को खंगालने की स्वतंत्रता देती है। यह किसी एक 'सत्य' की मांग नहीं करती, बल्कि इसमें विभिन्न परतें,
विरोधाभास और
अस्पष्टताएँ भी समाहित होती हैं। जहाँ जीवन अक्सर स्थिर और अपरिवर्तनीय प्रतीत हो
सकता है, वहीं कला तरल और प्रवाहमान होती है। यह हमें अतीत में झाँकने का अवसर देती है—इसलिए नहीं कि जो घटित हो चुका है उसे बदल सकें, बल्कि इसलिए कि वह घटना
हमारे भीतर किस रूप में जीवित है, उसे बदल सकें। ऐसा करने से,
यह यादों के तीखेपन
को नरम करती है और घावों को भरने के लिए एक नया स्थान बनाती है।
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| चित्तोप्रसाद का एक चित्र |
इसके साथ ही, कला व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वभौमिक अनुभवों से जोड़ती है।
जब हम रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से अपने जीवन को फिर से लिखते हैं, तो हम अक्सर पाते हैं कि हमारी कहानियाँ दूसरों के जीवन से भी मेल खाती हैं।
जो कार्य एक व्यक्तिगत प्रयास के रूप में शुरू होता है, वह धीरे-धीरे एक साझा अनुभव
बन जाता है। एक चित्र किसी और के मौन दुख की प्रतिध्वनि बन सकता है; एक गीत उन भावनाओं को व्यक्त कर सकता है जिन्हें केवल शब्द पूरी तरह से बयाँ
नहीं कर पाते। इस आदान-प्रदान के माध्यम से, कला अलग-थलग पड़े जीवन के
बीच सेतु का निर्माण करती है, और हमें यह याद दिलाती है कि हमारे संघर्ष और हमारी
खुशियाँ केवल हमारी अपनी ही नहीं हैं।
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| सोमनाथ होर का शिल्प |
जीवन को फिर से लिखने के इस कार्य में अदम्य साहस भी निहित है। सृजन करने का
अर्थ है—साहसपूर्वक सामना करना; अपने अनुभवों को सीधे-सीधे देखना और उनसे मुँह
मोड़ने के बजाय, उनके साथ जुड़ने का चुनाव करना। दर्द को सौंदर्य में, भ्रम को स्पष्टता में और मौन को एक सशक्त आवाज़ में बदलने के लिए अत्यंत
संवेदनशीलता और साहस की आवश्यकता होती है। और ठीक यही साहस है, जो कला को इतना शक्तिशाली और प्रभावशाली बनाता है। यह जीवन की मुश्किलों को
मिटा नहीं देता, बल्कि उन्हें एक नया रूप देता है—उन्हें देखने का एक नया
नज़रिया देता है और कभी-कभी, उनसे मुक्ति भी दिलाता है।
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| केजी सुब्रमण्यन की रचना |
कला जीवन की जगह नहीं लेती—बल्कि वह जीवन की फिर से कल्पना करती है। यह हमें
वह भाषा देती है जहाँ पहले कोई भाषा नहीं थी; वह ढाँचा देती है जहाँ पहले
केवल अव्यवस्था थी; और वह नियंत्रण का एहसास देती है जहाँ पहले केवल
अनिश्चितता थी। यह कहना कि कला जीवन को फिर से लिखने का एक माध्यम है, मानव अस्तित्व में उसकी गहरी भूमिका को स्वीकार करना है। यह एक ही साथ दर्पण
भी है और कलम भी: यह जो 'है' उसे दर्शाती है, और साथ ही हमें वह उसे
अभिव्यक्त करने की आज़ादी देती है जो जो महसूस किया गया है, और जो 'हो सकता है'।
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| अमित अम्बालाल की एक पेंटिंग |
कला के माध्यम से, हम जीवन से भागते नहीं हैं—बल्कि हम उसे फिर से लिखते
हैं, एक-एक पंक्ति करके।
1 comment:
बहुत-बहुत उम्दा, सर
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