Tuesday, March 24, 2026

डेविड हॉक्नीः भूदृश्य देखने का नया नजरिया

कला विचार / डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज




पिछले दिनों डेविट हॉक्नी (जन्म 9 जुलाई 1937) एक बार फिर चर्चा का विषय बने जब उन्होंने लंबे समय बाद एकबार फिर से इंग्लैंड लौटकर स्थानीय भूदृश्यों की दुनिया में प्रवेश किया और वह भी किसी बच्चे की तरह। पॉप आर्ट और भूदृश्यों की रचनाओं के साथ ही सेट डिजाइनिं, फोटोग्राफी, प्रिंट मेकिंग सहित अनेक क्षेत्रों में सक्रिय रहे हॉक्नी ने  20वीं सदी के उत्तरार्ध और 21वीं सदी में उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह प्रमाणित किया था कि हम प्रकृति को उस तरह एक बिंदु या एकरेखीय परिप्रेक्ष्य में कभी नहीं देखते, जैसा कि कला में माना जाता रहा है। दृश्यात्मक अनुभव का रूपांतरण करते हुए उन्होंने कैलिफ़ोर्निया की धूप से भरी पहाड़ियों से लेकर यॉर्कशायर की शांत गलियों तक, अपनी विशिष्ट दृश्य भाषा रंग योजना, परिप्रेक्ष्य और लगातार विकसित होते माध्यमों के प्रयोग के जरिये प्रकृति को देखने के तरीके को नए ढंग से प्रस्तुत किया है। कैनवास पेंटिंग से लेकर आईपेड ड्राइंग तक, बच्चों की तरह कुछ रचने से लेकर संतुलित पूल चित्रों तक उनका रचना संसार हमेशा विविधतापूर्ण रहा है। उनके काम हमेशा से अवलोकन और स्मृति के बीच के सूत्रों को स्थापित करते रहे हैं।



उन्होंने कला में किसी परिदृश्य को देखने के एकरेखीय परिप्रेक्ष्य सिद्धांत को खारिज करते हुए उसे एक नये अनुभव के रूप में स्थापित किया जिसमें अलग-अलग परिप्रेक्ष्य और आयाम के दृश्य-अनुभव एक समग्र अनुभव में रूपांतरित हो जाते हैं। उदाहरण के लिए हम किसी भवन के सामने खड़े होकर देखें तो वह जैसा दिखाई देगा, ठीक वैसा ही उसे दायीं या बायीं तरफ से देखने पर दिखाई नहीं देगा। यह दृश्य का विचलन नहीं है, दृश्यात्मक अनुभव का एकाकीपन है, पर मनुष्य का दृश्यात्मक अनुभव कभी एकरेखीय नहीं होता। वह किसी भी परिदृश्य को एक आयाम के साथ देखते हुए भी उसके अन्य आयामों के बारे में सोच रहा होता है। उसका यह किसी भी वस्तु या व्यक्ति को विभिन्न आयामों के साथ देखना मानसिक दृश्यात्मकता है जो कभी एकरेखीय नहीं हो सकती। मनुष्य के एकरेखीय दृश्य अनुभव में उसके पूर्व के अनुभवों यानी स्मृतियों और कल्पना का आगमन बगैर किसी विशेष प्रयास के हो जाता है। हॉक्नी ने इसी बात को अलग तरह से अपने चित्रों के माध्यम से प्रमाणित किया। उनके अनेक चित्रों में हमें एक ही विषय का चित्रण मिलता है जिनमें परिप्रेक्ष्य बदल कर वह देखते और दिखाते थे कि कोई भी परिदृश्य कितना ऊर्जावान और विस्फोटक हो सकता है।



लगभग छह दशकों के अपने करियर में वह अपने पोर्ट्रेट्स या पूलसाइड दृश्यों के लिए अधिक प्रसिद्ध रहे, पर उन्होंने अपने आसपास की दुनिया को निरंतर चित्रित किया- चाहे वह हॉलीवुड की पहाड़ियाँ हों या यॉर्कशायर का ग्रामीण परिदृश्य। हर बार उन्होंने परिचित दृश्यों को तीव्र रंगों, नवीन परिप्रेक्ष्यों और नई तकनीकों के माध्यम से एक अलग दृश्य अनुभव में रूपांतरित किया।



निकोलस कानयॉन (1980) उनकी वह रचना है जिसने देखने के पारंपरिक विचार को बदल दिया था। इस पेंटिंग में  लॉस एंजिल्स का एक भूदृश्य है जिसमें घुमावदार सड़कों और पहाड़ियों का एक उज्ज्वल, पैचवर्क-सा दृश्य है, जहाँ तीव्र लाल, बैंगनी और हरा रंग एक साधारण शहरी घाटी को ऊर्जा से भर देते हैं। इसमें आकाशीय परिप्रेक्ष्य (एरियल व्यू) के साथ अतिरंजित वक्र पारंपरिक एक-बिंदु परिप्रेक्ष्य को चुनौती देते हैं, जिससे दर्शक की दृष्टि पूरे दृश्य में घूमती रहती है। यही बहु-दृष्टिकोण बाद में उनकी कला की पहचान बन गया।



हॉक्नी लंबे समय से एक-बिंदु या एकरेखीय परिप्रेक्ष्य को अस्वीकार करते रहे हैं। घनवाद और मानवीय दृष्टि के अपने अध्ययन के आधार पर वह मानते हैं कि हमारी दृष्टि कभी स्थिर नहीं होती। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारी आँख हमेशा गतिशील रहती है, इसलिए पुनर्जागरण काल की कला में जो एक बिंदु परिप्रेक्ष्य की अवधारणा स्थापित की गई थी वह वास्तविक अनुभव को पकड़ने में अपर्याप्त है। वे मानते हैं कि हम परिदृश्य को किसी एक स्थिर बिंदु से नहीं, बल्कि उसके भीतर चलते हुए अनुभव करते हैं। इसलिए उन्होंने एक ऐसी दृष्टि विकसित की, जिसमें एक ही चित्र में अनेक दृष्टिकोण और समय के क्षण समाहित होते हैं। इस काम के लिए उन्होंने कोलाज तकनीक का भी प्रयोग किया।



यह विचार उनकी फोटो-कोलाज कृतियों, जैसे Merced River, Yosemite Valley (1983), में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कई तस्वीरों को जोड़कर बनाए गए ये चित्र जानबूझकर खंडित होते हुए भी एक समग्र अनुभव प्रस्तुत करते हैं। यह कैमरे की एकल दृष्टि को चुनौती देते हैं और वास्तविक जीवन में अनुभव किए जाने वाले स्थान की अधिक समृद्ध अनुभूति प्रदान करते हैं।



हॉक्नी का मानना है कि ड्रॉइंग हमें अधिक स्पष्ट रूप से देखना सिखाती है। घास की बनावट, पानी पर प्रकाश का खेल, और पेड़ों के विशिष्ट आकारये सब प्रकृति के गहन अवलोकन से उत्पन्न होते हैं, चाहे उन्हें प्राकृत्रिक रंगतों के साथ या भिन्न रंग योजना के साथ रचा गया हो, या सरल रूपों में क्यों न प्रस्तुत किया गया हो। इस तरह, वे परिदृश्य चित्रकला की उस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, जो हमें यह सिखाती है कि कला हमारे दैनिक अनुभवों में छिपे गहरे सत्य को उजागर कर सकती है। 



2000 के दशक में उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के यॉर्कशायर वोल्ड्स में अपनी जड़ों की ओर एक उल्लेखनीय वापसी की। कैलिफ़ोर्निया में दशकों बिताने के बाद, वे ब्रिडलिंगटन के आसपास के शांत ग्रामीण क्षेत्र की ओर लौटेवही इलाका जहाँ उनका बचपन बीता था। इस वापसी ने उनकी सृजनात्मक ऊर्जा को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया। उन्होंने स्थानीय पेड़ों, सड़कों और जंगलों को उसी उत्साह से चित्रित किया, जैसे उन्होंने लॉस एंजिल्स के स्विमिंग पूलों के चित्र बनाये थे।



अक्सर खुले वातावरण में काम करते हुए, उन्होंने यॉर्कशायर के बदलते मौसम और वातावरण को उसी क्षण में दर्ज करने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप एक विशाल और प्रभावशाली कृतिसमूह सामने आया, जिसने समकालीन समय के लिए ब्रिटिश परिदृश्य चित्रकला को नए ढंग से परिभाषित किया। इस दौर का एक प्रमुख रूपक हैघुमावदार ग्रामीण सड़क, जो परिदृश्य के भीतर से गुजरती है। पारंपरिक फीकी सर्द धूप से अलग, चमकीले रंगों के प्रयोग के माध्यम से हॉक्नी ने इस क्षेत्र की सुंदरता को नए रूप में प्रस्तुत किया। इंप्रेशनिस्ट कलाकारों की तरह, वे केवल दृश्य यथार्थ नहीं, बल्कि स्थान की अनुभूति और भावना को चित्रित कर रहे थे।



इस यॉर्कशायर काल की एक महत्वपूर्ण परियोजना है The Arrival of Spring in Woldgate, East Yorkshire, जिसे पूरी तरह आईपैड पर बनाया गया। 2011 में, उन्होंने जनवरी से मई तक वसंत ऋतु के क्रमिक आगमन को दर्ज कियासर्दियों की नीरसता से लेकर मई की हरियाली तक। प्रत्येक डिजिटल ड्रॉइंग को तिथि के साथ अंकित किया गया और बाद में बड़े आकार में प्रिंट किया गया, जिससे यह श्रृंखला दिन-प्रतिदिन बदलते मौसम का दस्तावेज़ बन गई। 2025 में, इन प्रिंट्स की एक नीलामी में उल्लेखनीय सफलता मिली, जहाँ सभी कृतियाँ अपेक्षा से अधिक मूल्य पर बिकीं।

हॉक्नी के यॉर्कशायर परिदृश्य उनके कैलिफ़ोर्निया के चमकदार दृश्यों से स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। 1960 के दशक में लॉस एंजिल्स में उन्होंने धूप, अवकाश और आधुनिक जीवनशैली को चित्रित कियाजैसे A Bigger Splash (1967)। जहाँ यॉर्कशायर के चित्र ऋतुओं के सूक्ष्म बदलाव को दर्ज करते हैं, वहीं कैलिफ़ोर्निया के चित्र प्रकाश और जीवन के आकर्षण को महिमामंडित करते हैं।

अपने करियर के उत्तरार्ध में, हॉक्नी ने डिजिटल माध्यमों को अपनाकर परिदृश्य कला को और विस्तारित किया। फैक्स मशीन से लेकर आईफोन और आईपैड तक, उन्होंने नए माध्यमों के प्रति अपने आकर्षण को बार-बार सिद्ध किया। इस डिजिटल प्रयोग ने न केवल उनके काम को नई दिशा दी, बल्कि 21वीं सदी के दर्शकों के लिए परिदृश्य को देखने के तरीके को भी प्रभावित किया। उनका डिजिटल पेंटिंग की ओर रुझान 2008 में शुरू हुआ, जब उन्होंने ब्रुशेस (Brushes)  नामक ऐप का उपयोग करते हुए आईफोन पर ड्रॉइंग बनाना शुरू किया। 2010 में आईपैड के आने के साथ उन्हें एक बड़ा कैनवास मिला, और उन्होंने शीघ्र ही इस माध्यम की कलात्मक संभावनाओं को पहचान लिया। आईपैड और ब्रुशेस ऐप के माध्यम से वे असीमित रंगों तक पहुँच सकते थे, बिना रंग सूखने का इंतज़ार किए तेज़ी से काम कर सकते थे, और स्क्रीन की रोशनी के कारण अंधेरे में भी चित्र बना सकते थे। इस माध्यम की गति और लचीलापन उनके उस पुराने आग्रह के अनुकूल था, जिसमें वे सीधे अवलोकन से बिना विलंब काम करना चाहते थे।

हॉक्नी ने यह सिद्ध किया कि टचस्क्रीन पर भी गंभीर कला संभव है, और इस तरह उन्होंने फाइन आर्ट की दुनिया में डिजिटल पेंटिंग को वैधता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2011 में जब उन्होंने पहली बार अपने आईपैड ड्रॉइंग प्रदर्शित किए तो आलोचक और दर्शक उनकी चित्रात्मक गुणवत्ता और समृद्धता से आश्चर्यचकित रह गए। पिक्सेल्स से बने होने के बावजूद, उनमें हॉक्नी की विशिष्ट शैली स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। इसका एक कारण यह है कि उन्होंने आईपैड को भी पारंपरिक माध्यमों की तरह ही अपनाया। उनके अनुसार, देखने और ड्रॉ करने की प्रक्रिया में कोई अंतर नहीं है- यदि आप पूरे दिन आईपैड पर ड्रॉ करते हैं,  तो सफाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन देखने और बनाने की क्रिया वही रहती है।

पारंपरिक कलात्मक सिद्धांतों और आधुनिक तकनीक के इस संयोजन के माध्यम से हॉक्नी ने एक बार फिर यह बदल दिया कि हम परिदृश्य को कैसे देखते हैं। 2010 के दशक के मध्य तक, वे बहु-स्क्रीन वीडियो इंस्टॉलेशन की ओर भी बढ़े, जिनमें एक ही दृश्य को कई कैमरों से अलग-अलग कोणों से रिकॉर्ड किया गयायह भी परिदृश्य को बहु-दृष्टिकोण से देखने का एक प्रयोग था।

फिर भी, उनके आईपैड पर बनाए गए परिदृश्य सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुए, क्योंकि वे शास्त्रीय और समकालीन के बीच सीधा सेतु बनाते हैं। उन्होंने यह प्रमाणित किया कि सत्तर और अस्सी की उम्र में भी वह देखने के नए तरीकों की एक क्रांतिकारी अवधारणा का नेतृत्व कर सकते हैं।

 * All images have been sourced from Google and are used solely for reference purposes. Their use serves no commercial objective.. 

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