Wednesday, March 25, 2026

कलाक्ष आर्ट ग्रुप की अंश–अनंत प्रदर्शनी





प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर कलाकार स्वाति मिश्रा, चित्रा सिंह, डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज, श्री राज शेखर व्यास, श्री काजी एम रागिब और अन्य कलाकार।


कला अनंत है, जो एक अंश से शुरु होती है। वह अंश रंग का हो सकता है, कपास का, धातु का, मिट्टी का, किसी भी ऐसी सामग्री का हो सकता है जिसमें कलाकार अपनी अभिव्यक्ति करना चाहता है। कलाक्ष आर्ट ग्रुप की समूह प्रदर्शनी "अंशअनंत" इसी बात को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन गांधी दर्शन आर्ट गैलरी में गांधी स्मृति दर्शन समिति के निदेशक श्री सचिन कुमार, डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज, श्री राज शेखर व्यास और श्री काजी एम रागिब द्वारा किया गया।  

 विभिन्न आयु वर्ग के इन कलाकारों ने पेंटिंग के साथ ही शिल्प को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम चुना है। प्रदर्शनी के विषय "अंशअनंत" का एक पक्ष दार्शनिक है तो दूसर आध्यात्मिक, इसीलिए प्रदर्शित ज्यादातर कामों में हमें आध्यात्मिकता का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। श्रीकृष्ण-राधा से लेकर बुद्ध और प्रकृति के प्रतिकात्मक अंकन के माध्यम से कलाकारों ने इस बात को प्रभावी तरीके से दिखाया है कि ब्रह्मांड के एक अंश के रुप में मनुष्य में अनंत विस्तार की संभावना रहती है। प्रदर्शनी की क्यूरेटर सुनीता भराल और चित्रा सिंह की कला में आध्यात्मिकता के साथ ही प्रेम, शांति और सहअस्तित्व के व्यावहारिक पक्ष भी सांकेतिक रुप में सामने आते हैं। चित्रा सिंह के शिल्प इस संदर्भ में उल्लेखनीय हैं। पूनस सैनी की कला जीवन के रास्ते की संभावनाओं की तलाश की तरफ संकेत करती है तो वर्षा बरुआ की रचनाओं में आत्म-प्रकाश और खोज के संकेत हैं।


कलाकार सुनीता भराल मुख्य अतिथि को अपनी पेंटिंग्स दिखाती हुईं। 


सुमित सिन्हा भारतीय शिल्प परंपरा के कुछ शिल्पों को पेंटिंग के रुप में रचते हुए दो भिन्न विधाओं के बीच एक नया संबंध स्थापित करते हैं। सानिया कनोजिया की कला अधिक प्रतिकात्मक तरीके से अंश के अनंत होने की बात कहती हैं। सना सिकदर का काम भी दर्शनीय है। स्वाती मिश्रा की रचनाओं में जीवन के आकार लेने से उसके अनेकानेक दिशाओं में विस्तारित होने की अभिव्यक्ति है। वह लघुचित्र कला और लोक कलाओं की परंपराओं के अंशों को समकालीन कला की अभिव्यक्ति बना देती हैं। पूजा सोनी की कला का केंद्र पौराणिक आख्यानिक चरित्र हैं जो भारतीय जीवन के आधार हैं। अशिता और स्वदेश श्रीवास्तव तो नन्हें कलाकार हैं जो अपने पंखों को फैलाकर बता रहे हैं कि वह भी कला के आकाश में लंबी उड़ान के लिए तैयार हैं।  

गैलरी में प्रदर्शित शिल्प और चित्र। 

गैलरी का दृश्य


कला अपने विभिन्न रूपोंचित्रकला और मूर्तिकलामें मानवीय अस्तित्व के उन अंशों का प्रतिनिधित्व करती है, जो अनंत तक विस्तृत हैं। कोई भी कलाकृति अपने आप में कभी भी पूरी तरह से पूर्ण नहीं होती; वह मानवीय रचनात्मकता का मात्र एक अंश होती है, और फिर भी उस अंश के भीतर ही संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित होता है। कैनवस पर उकेरा गया प्रत्येक रंग और प्रत्येक रूप अपने अस्तित्व में पूर्ण है, और अपनी अभिव्यक्ति में अनंत है।

गैलरी में प्रदर्शित चित्र।





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