Saturday, April 4, 2026

माटी-।।। प्रदर्शनी में लोक व समकालीन कला का समन्वय


प्रदर्शनी रपट- डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज


दीपोत्सव के अवसर पर श्रीमती शांति देवी, श्री विनोद नारायण इंदुकर, 
श्री  विनोद भारद्वाज, श्री  संतोष श्रीवास्तव और श्री  जय त्रिपाठी।


विमला आर्ट फोरम की वार्षिक प्रदर्शनी माटी-।।। का उद्घाटन 3 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली की अर्पणा आर्ट गैलरी में हुआ। इस प्रदर्शनी में समकालीन कलाकारों के साथ ही लोक कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन भी किया गया है। इसके साथ ही इस प्रदर्शनी में कई देशों के कलाकारों के काम भी शामिल हैं। इस प्रदर्शनी की संयोजक श्रीमती कंचन मेहरा हैं और इसे क्यूरेट किया है कलाकार दिलीप शर्मा ने। यह प्रदर्शनी 9 अप्रैल तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

श्रीमती कंचन मेहरा व श्री जय त्रिपाठी दीप जलाते हुए। 


प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि विनोद नारायण इंदुकर ने भारतीय कला परम्परा का उल्लेख करते हुए 'रूपभेदः प्रमाणानि भावलावण्ययोजनम। सादृश्यं वर्णिकाभंग इति चित्रं षडंगकम्।।' श्लोक के उदाहरण और उसकी व्याख्या के माध्यम से भारतीय कला दृष्टि का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में रूपभेद, प्रमाण, भाव, लावण्ययोजना, सादृश्य और वर्णिकाभंग यह षडंग दृश्य कला के शाश्वत आधार हैं। इस श्लोक की व्याख्या करने के साथ उन्होंने प्रदर्शनी के अवलोकन के अपने अनुभव को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। कला की इस प्रदर्शनी को देखते हुए उन्होंने पाया है कि इसमें कला के सभी छह अंग समाहित हैं। प्रत्येक कलाकार ने जिस सुंदरता और प्रभावशाली तरीके से रूप, प्रमाण, रंग, भाव, संयोजन आदि का पालन करते हुए अपने भावों और विचारों को प्रस्तुत किया है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कला कि कला में कलाकार की अभिव्यक्ति के साथ ही देखने वालों की अनुभूति और प्रतिक्रिया को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दर्शक कला को देखते हुए उसे अपनी तरह से समझने और उस अनुभव को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होता है। उन्होंने एक तरह से इस बात को प्रमाणित किया कि कला में कलाकार के साथ ही दर्शक की सक्रिय भूमिका भी समान महत्व रखती है।







केएसकेटी के डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव ने अपने सम्बोधन में कहा कि कला ही मनुष्य को सभी जीवों में श्रेष्ठ व अलग प्रमाणित करती है। उन्होंने प्रदर्शनी के लिए विमला आर्ट फोरम को बधाई देते हुए कहा कि इसमें कलाकारों ने बहुत प्रभावशाली काम किए हैं। पदम् श्री शांति देवी ने अपनी कला यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि किसी तरह उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में काम करते राष्ट्रीय पुरस्कार और पदम् श्री तक का सफर पूरा किया। उन्होंने कहा कि पहली बार मुझे अपनी पेंटिंग के लिए 20 रुपए मिले थे। उन्होंने गाँव की दूसरी महिलाओं और लड़कियों को लोक कला करना सिखाया। 




वरिष्ठ आलोचक, कवि व फिल्मकार विनोद भारद्वाज ने प्रदर्शनी में लोक व आधुनिक कला को एक साथ प्रदर्शित करने की प्रशंसा करते हुए विमला आर्ट फोरम को इसके लिए बधाई दी। कला में सौन्दर्य की भूमिका और समकालीन कला की चर्चा करते हुए उन्होंने कई उदाहरणों देते हुए दोनों तरह की कला के बीच संबंध पर बल दिया। कलाकार व आलोचक जय त्रिपाठी ने एक अच्छे आयोजन के साथ वक्ताओं को कला पर सरगर्भित वक्तव्य के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि विमला आर्ट फोरम और इसकी संस्थापक ट्रस्टी कंचन मेहरा ने महत्वपूर्ण काम किया है। इस अवसर पर श्रीमती कंचन मेहरा ने सभी अतिथियों और कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विमला आर्ट फोरम की कोशिश रहती है कि सभी कलाओं को एक मंच पर लाया जाए। उन्होंने इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर व कलाकार दिलीप शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि सबके सहयोग से यह आयोजन हो सका है।

कलाकार रवि , अरबिंद कुमार, रागिनी सिन्हा, जय त्रिपाठी और बिपिन कुमार।



प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर इसमें शामिल कलाकारों के साथ ही अन्य वरिष्ठ कलाकार भी उपस्थित थे। इन अतिथियों में वरिष्ठ कलाकार धर्मेंद्र राठौर, नीरज शर्मा, रितु सिंह, रागिनी सिन्हा, नरेंद्र पाल सिंह, कलाकार व क्यूरेटर अनूप कामत, राजेश चंद, स्मिता जैन, शिखा गुप्ता अग्रवाल, कविता राजपूत, मीतू कपूर आदि शामिल थे। 



श्री विनोद भारद्वाज और श्रीमती कंचन मेहरा



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