Thursday, April 9, 2026

जहांगीर आर्ट गैलरी मुंबई में कामिनी बघेल की एकल प्रदर्शनी

  


कामिनी बघेल की एकल प्रदर्शनी हयूज़ और ऑफ़ वुमनहुड मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में 6 अप्रैल 2026 को शुरू हुई है जो 12 अप्रैल तक रहेगी। प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर ज्येष्ठ चित्रकार श्री प्रकाश भिसे मुख्य अतिथि रहे। साथ ही राम अवस्थी, डॉ. श्री शिरीष आंबेकर, श्री विनोद दांडगे (संचालक, कला शिक्षण मंडल, महाराष्ट्र राज्य), प्रा. शशिकांत काकडे (कुलसचिव, डिनोवा यूनिवर्सिटी), चित्रकार श्री तुषार शिंदे, प्रा. निलेश पालव, चित्रकार सोनाली अय्यर, चित्रकार मिलिंद ठाकूर, चित्रकार रमेश पाचपांडे, नीता देसाई,शुभ्रा गुप्ता एवं बॉलीवुड कलाकार अशोक कुमार सरोज,ब्रजेश मौर्या एवं सिमरन कौर की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रदर्शनी में शामिल रचनाओं को सभी अब्रजेश तिथियों ने सराहते हुए कामिनी बघेल को इस प्रदर्शनी के लिए बधाई दी। 


कामिनी बघेल, रमेश पचपांडे और राम अवस्थी 



बॉलीवुड कलाकार अशोक कुमार सरोज, ब्रजेश मौर्य, सिमरन कौर व अन्य अतिथि 





कामिनी बघेल और श्रीमती मेनन 


कामिनी बघेल की कला मुलरूप से स्त्रियों के संसार की कथा कहती है। इन कथाओं में स्त्रियों का पारिवारिक संसार है, उनकी रागात्मकता है, और साथ ही अपने परिवेश के साथ जुड़ाव बनाते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान का संघर्ष भी है। वह ज्यादातर तेल रंग में काम करती हैं पर उसमें वह जिस तरह से पारदर्शिता और टैक्सचर का प्रयोग करती हैं वह उनकी कला को गहराई देता है। उनके यहाँ स्त्री अकेली कम दिखाई देती है। इसकी जगह वह उन्हें भरे पूरे संसार के साथ प्रस्तुत करती हैं। इस भरे पूरे संसार में मानवीय संबंधों के साथ ही वह पशु व पक्षियों के साथ उसके संबंध को भी रचती हैं। 




रचना शैली उनकी आकृति प्रधान है पर कहीं कहीं वह आकृतियों को धुंधला रखते हुए एक रहस्य की स्थापना करती हैं। आकृति को अस्पष्ट रखते हुए वह स्त्री की सामाजिक स्थिति की तरफ संकेत करती हैं।

कामिनी बघेल का काम इंसानी रिश्तों की एक संवेदनशील और लगातार खोज पर आधारित है, जिसे प्रकृति, परिवार और समाज के बड़े दायरे में देखा जाता है। उनकी पेंटिंग्स ज़िंदा अनुभव से निकलती हैं, जहाँ माँ और बच्चे, आदमी और औरत और दोस्ती के बीच के गहरे रिश्ते हमेशा रहने वाले दृश्य रूपक में बदल जाते हैं। इन रिश्तों को सिर्फ़ दिखाया ही नहीं जाता बल्कि महसूस भी किया जाता है, जिससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बनाने वाले भावनात्मक टेक्सचर का पता चलता है। कामिनी की प्रैक्टिस छोटे शहरों और ग्रामीण भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने में गहराई से जुड़ी हुई है। उनके चरित्र अक्सर औरतें होती हैं, जिन्हें शांत मज़बूती और खुद को समझने के साथ दिखाया जाता है। उनके ज़रिए, वह आज के समाज में औरतों की पहचान, अपनेपन और बदलती भूमिका पर सोचती हैं। उनके नज़रिए में ईमानदारी है - वह महानगर की मुश्किलों को दिखाने की कोशिश नहीं करतीं, बल्कि अपने माहौल के प्रति वफ़ादार रहना चुनती हैं। यह जुड़ाव उनके काम को असलीपन और इमोशनल क्लैरिटी देता है। सामान्य तौर पर, उनकी पेंटिंग्स सादगी और संयम से पहचानी जाती हैं। शानदार कलर हारमनी और छूने में अच्छी लगने वाली सतहें शांति का एहसास कराती हैं, जबकि संयोजन अक्सर यथार्थ और अमूर्तन के बीच संतुलन बनाता है । आकृति प्रधान रूपों के साथ अमूर्त या अमूर्त समान तत्वों की मौजूदगी एक उलझन की परत लाती है, जो देखी और अनदेखी चीज़ों के बीच एक हल्का अंतरसंबंध पैदा करती है। यह दोहरापन उनके काम को एक शांत रहस्य का एहसास देता है, जिससे देखने वाले को गहरा जुड़ाव मिलता है।

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