नई दिल्ली की आईफैक्स आर्ट गैलरी में 24 से 30 अप्रैल 2026 तक अमृता प्रकाश की क्यूरेट की हुई आर्ट स्पेक्ट्रा 2026 समूह प्रदर्शनी नई संभावनाओं को सामने लाती है। यह प्रदर्शनी इस बात को स्थापित करती है कि कला में क्या और कैसी कला से अधिक महत्वपूर्ण है होना। कला का होना अपने आप में मनुष्य के जीवन की ऐसी घटना है जिसका मूल्यांकन करना संभव नहीं है। कला का होना दरअसल मनुष्य के होने का एक आयाम है जिसे कलाकार अपने स्तर पर हमेशा पूर्ण करने का प्रयास करते हैं। इस प्रदर्शनी में एकदम युवा कलाकार भी हैं और उम्रदराज कलाकार भी। यह देख कर सुखद अनुभूति होती है कि कितने ही ऐसे कलाकार हैं जिनका नाम ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं पर वह अपने स्तर पर बहुत ही प्रभावशाली काम कर रहे हैं। इस प्रदर्शनी में रेजिन में नए प्रयोग भी देखने को मिले तो साथ ही चारकोल में प्रभावशाली व्यक्ति चित्र भी।
प्रदर्शनी की
क्यूरेटर अमृता प्रकाश इस बात के लिए बधाई की हक़दार हैं कि उन्होंने कई कलाकारों
को प्रदर्शनी का अवसर देकर उनकी कला को संभावनाओं का नया आकाश दिया है। कला की
उड़ान की कोई सीमा नहीं है, पर उसमें उड़ना पहली शर्त है। यह प्रदर्शनी इसी उड़ान को सामने लाने का काम करती
है।
प्रदर्शनी में शामिल अरविद कुमार कृष्णन, प्रदीप लखेरा, शिखा वर्मा, शांति विंजमुरी, अनिमेश देबनाथ, सुनील कुमार, आरशी खानम, राहुल बसवाल, दीबा कुरैशी, आदि के काम प्रभावित करते हैं। प्रदर्शनी में शामिल अन्य कलाकारों में तान्या आनंद, सुरभी संद सुराना, आस्था बिदानी, प्रिया भारद्वाज, प्रेरणा सेन, कार्तिक, विशाखा भल्ला, योगिता श्रीवास्तव, रुचि गइराला, उदभाष मुखर्जी, कविता कटारिया, शालू खंडेलवाल, शुभम कौल, हशमित वर्मा, राकेश सोनकुसारे, अश्विन कुमार, विजया, शांति श्रीवास्तव का काम भी अच्छा है।
कला में हमेशा कुछ
बेहतर करने की संभावना बनी रहती है, जो इस प्रदर्शनी को देखकर साबित होता है। कोई
भी रचना कभी भी पूर्ण नहीं होती, चाहे कोई कितना ही बड़ा और मशहूर कलाकार क्यों न
हो। इस प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों के साथ एक अच्छी बात यही है कि सभी कला में
अपनी राह तलाश रहे हैं। कुछ का सफर अभी शुरु हुआ है तो कई इस सफर पर काफी आगे बढ़
चुके हैं।






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