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| राशिद अहमद अपनी पेंटिंग्स के साथ। फोटोः प्रवीण महतो |
एक बिंदु में सब कुछ समाहित है—यहीं से सृष्टि का आरंभ होता है और अंत भी उसी में विलीन हो जाता है। विज्ञान
के सुक्ष्मदर्शी विश्लेषण से लेकर अंतरिक्ष से सृष्टि के अवलोकन की सुक्ष्मता व उसका
अनंत विस्तार इसी बिंदु का विस्तार है। इसी दार्शनिक अवधारणा को अपनी कला में
विस्तार देते हैं कलाकार राशिद अहमद। उनकी एकल प्रदर्शनी “बिंदुः डॉट्स सीरिज” का उद्घाटन 2 मई 2026 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की एनेक्सी गैलरी में हुआ।
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| प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर सुषमा बहल, राशिद खान, डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज, अनूप कामथ, पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक और अन्य अतिथि। |
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में क्यूरेटर एवं कला
समीक्षक सुश्री सुषमा बहल उपस्थित थीं। इस अवसर पर क्यूरेटर अनूप कामथ, डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज और
श्री दुर्गेश सहित अनेक कला-प्रेमी मौजूद रहे। कलाकार अरुण बोरा, उमाशंकर पाठक, इबरार अहमद, अनामिका एस और
क्यूरेटर प्रवीण महतो सहित अनेक कलाकारों और कला प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन
को और समृद्ध बनाया।
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| प्रवीण महतो, राशिद अहमद, अरूण बोहरा, उमा शंकर पाठक, डॉ वेद प्रकाश भारद्वाज और अनूप कामथ। |
राशिद अहमद की कला में गहरे रंगों—विशेषकर काले और भूरे—की प्रधानता है, जिनके माध्यम से वे ऐसी दृश्यावली रचते हैं जिसमें एक ओर प्रत्यक्ष जगत का आभास होता है, तो दूसरी ओर रहस्य की गहराई भी बनी रहती है। उनकी कई रचनाओं में नीले रंग के साथ ही भूरे रंग की हल्की-गहरी रंगतों का प्रयोग भी है जो उनकी कला को विस्तार देता है। राशिद समस्त ब्रह्मांड—जिसमें मनुष्य भी शामिल है—को एक ‘बिंदु’ के रूप में देखते हैं, और इस दृष्टि से आकार के निराकार हो जाने की चेतना को व्यक्त करते हैं। कोई भी परिचित आकार उनकी रचनाओं में अनुभूति के स्तर पर ही जागृत होता है, उसे उसके भौतिक रूप के स्थान पर सार-तत्व के रुप में ही देखा-समझा जा सकता है।
कैनवास पर गतिमान
रेखाओं के साथ बिंदु का एक दिशा से दूसरी दिशा में विस्तार, उनके आकारों में
भिन्नता सृष्टि की गतिशीलता की अभिव्यक्त है। वह कहते हैं कि कैनवास पर जो रेखाएँ
हैं, वह यात्रा है। यदि यह कहा जाए कि उनके कैनवास पर जो रेखाएँ हैं, वह किसी
नक्शे की तरह पृथ्वी को विभाजित करती हैं, तो कुछ गलत नहीं होगा। उनकी रचनाएँ इसी
अनुभूति के साथ जीवंत होती हैं कि उनमें मानव सभ्यता की यात्रा समाहित है, और इस
चराचर संसार की गति का प्रतिकात्मक अंकन भी है। उनकी रचनाओं में परतों का अत्यधिक
महत्व है। अक्सर एक परत के पीछे से दूसरी परत झांकती दिखाई देती है। राशिद इसे
जीवन के अनुभवों से जोड़ते हैं। उनके अनुसार व्यक्ति की जितनी उम्र होती है, उतने
ही वर्ष की परतें उसके व्यक्तित्व का हिस्सा होती हैं। कई बार सतह पर जैसे कुछ
खुरचा गया प्रतीत होता है, क्या यह जीवन की विकट स्थितियों की खरोंच हैं, कहना मुश्किल
है।
उनकी कला किसी डिजाइन-प्रधान संरचना की बजाय भाव और विचार के स्तर पर संवाद
करती है। उनकी रचनाएँ एकरेखीय दृश्यात्मक अनुभव को अस्वीकार करते हुए बहुस्तरीय
अर्थों और व्याख्याओं की संभावना खोलती हैं। एक्रेलिक और ऑयल रंगों के साथ-साथ
कपड़ा, पेपर और रेत जैसे
माध्यमों का प्रयोग उनके कार्यों में गहराई और उभरे हुए टेक्सचर को जन्म देता है
जो दर्शकों को आकर्षित करता है।
इस अवसर पर सुषमा बहल ने कहा कि राशिद की रचनाओं में पृथ्वी, जल, आकाश, पहाड़ और वृक्ष—सभी तत्व एक साथ आभासित होते हैं, मानो समूचा प्रकृति-तंत्र एक ही बिंदु में सिमट आया हो।








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