एक स्टूडियो मुलाकात, जिसने एक परिचित कलाकार के रचनात्मक संसार के नए आयाम खोले
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| कंचन मेहरा के साथ डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज उनकी कला पर चर्चा करते हुए। |
एक कलाकार के तौर पर मैं कंचन मेहरा को लंबे समय से जानता हूँ। उनकी रचनाओं को
देखने और उनके साथ संवाद करने के अवसर भी मिले हैं। लेकिन 10 अक्टूबर 2026 की दोपहर गुरुग्राम स्थित विमला आर्ट फोरम के उनके
स्टूडियो में मुलाकात का अनुभव कुछ अलग था। लगा, जैसे इस बार उनके भीतर के कलाकार से पहली बार पूरी
तरह परिचित होने का अवसर मिला हो।
कंचन मेहरा विमला आर्ट फोरम की संस्थापक ट्रस्टी हैं। उनके कैनवास चित्रों से
मेरा पहले भी परिचय रहा है, लेकिन इस बार उनके जलरंग देखने का अवसर मिला। इन कृतियों ने उनकी कला के ऐसे
पक्ष से परिचित कराया, जिसमें प्रकृति के प्रति अनुराग, मानवीय संवेदनाओं की समझ और जीवन को अनेक दृष्टियों से
देखने की ललक एक साथ दिखाई देती है।
लगभग पंद्रह वर्षों के कला-सफर में कंचन मेहरा ने अभिव्यक्ति के कई आयाम तलाशे
हैं। उनकी आगामी एकल प्रदर्शनी में इन विविधताओं को देखने का अवसर मिलेगा। उनके
लिए कला किसी एक विषय या विचार तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को उसकी बहुलता में समझने और अभिव्यक्त
करने का माध्यम है।
प्रकृति से मनुष्य तक
प्रकृति कंचन मेहरा की कला का केंद्रीय विषय है, लेकिन उसका अर्थ केवल पेड़-पौधों, पहाड़ों, जल और आकाश के दृश्यों तक
सीमित नहीं है। वह सजीव प्रकृति में अधिक रुचि रखती हैं, जिसमें मनुष्य और उसका संसार भी शामिल है। उनके लिए
जीवन के सामाजिक और पारिवारिक संबंध, भावनाएँ तथा अनुभव भी प्रकृति के ही विविध रूप हैं।
उनके चित्रों में प्राकृतिक सौंदर्य की अनेक दृश्यावलियाँ हैं। कहीं प्रकृति
की सहजता आकर्षित करती है, तो कहीं उसके माध्यम से जीवन की संवेदनात्मक उपस्थिति महसूस होती है। उनकी कला
में एक तरह की मासूमियत भी है—चीजों को सहज दृष्टि से देखने और परिचित दृश्यों में भी सौंदर्य तलाशने की
मासूमियत।
विषयों की यह विविधता जीवन को कई स्तरों पर देखने की उनकी प्रवृत्ति से जुड़ी
है। मनुष्य उनके लिए केवल किसी दृश्य का हिस्सा नहीं, बल्कि भावनाओं, स्मृतियों और संबंधों से निर्मित एक स्वतंत्र संसार
है। उनकी रचनात्मक रुचि इस संसार के सामाजिक और पारिवारिक पक्षों के साथ उसकी
आंतरिक संवेदनाओं तक जाती है।
अध्यात्म की आंतरिक उपस्थिति
कंचन मेहरा की कला में अध्यात्म भी एक महत्त्वपूर्ण आयाम है। उनकी रचनाओं में
यह प्रकृति और मानवीय संवेदना से अलग-थलग नहीं, बल्कि उनके साथ विभिन्न संयोजनों में उभरता है।
बाहरी संसार को देखने के साथ-साथ भीतर के अनुभवों को समझने की आकांक्षा उनकी कला
को व्यापक अर्थ देती है।
प्रकृति, मनुष्य और अध्यात्म के बीच बनने वाले संबंध उनके चित्रों को केवल
दृश्य-सौंदर्य तक सीमित नहीं रहने देते। वे जीवन को अनुभव करने और उसके अर्थ
तलाशने की संभावनाएँ खोलते हैं। यही वजह है कि उनकी कला में विषयों की विविधता के
साथ संवेदना के अलग-अलग स्तर भी दिखाई देते हैं।
जलरंगों में एक नया परिचय
इस स्टूडियो मुलाकात का सबसे खास पक्ष उनके जलरंग चित्रों को देखना था। जलरंग
की पारदर्शिता, प्रवाह और सहजता कलाकार से माध्यम के प्रति विशेष संवेदनशीलता की अपेक्षा करती
है। कंचन मेहरा के जलरंगों ने उनके रचनात्मक व्यक्तित्व का एक नया पक्ष सामने रखा।
उनके काम को देखते हुए यह समझने का अवसर मिला कि कलाकार एक ही जीवनानुभव को
अलग-अलग माध्यमों में किस तरह अभिव्यक्त कर सकता है।
उनकी कला को समझने के लिए केवल विषयों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं; यह देखना भी जरूरी है कि वे
अपने अनुभवों को किस तरह रंगों और आकृतियों में रूपांतरित करती हैं। कैनवास और
जलरंग, दोनों माध्यमों में
उनकी सक्रियता उनके रचनात्मक विस्तार का संकेत देती है।
एक प्रदर्शनी, अनेक दृष्टियाँ
कंचन मेहरा की आगामी एकल प्रदर्शनी उनके लगभग पंद्रह वर्षों के कला-सफर के
विविध पक्षों को देखने का अवसर होगी। प्रकृति, मानवीय संबंधों, भावनात्मक अनुभवों और अध्यात्म से जुड़े उनके विषय
जीवन को किसी एक निष्कर्ष में बाँधने के बजाय उसकी बहुलता को सामने लाते हैं।
10 अक्टूबर की उस दोपहर स्टूडियो में हुआ अनुभव मेरे लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण था
कि एक परिचित कलाकार की कला को नए सिरे से देखने का अवसर मिला। कभी-कभी कुछ अनदेखी
कृतियाँ और एक आत्मीय संवाद किसी कलाकार के रचनात्मक संसार की ऐसी परतें खोल देते
हैं, जो पहले हमारी
दृष्टि से ओझल रही हों।
कंचन मेहरा की कला से यह मुलाकात इसी अर्थ में उल्लेखनीय रही। उनके चित्रों
में प्रकृति का सौंदर्य, मनुष्य की संवेदना और अध्यात्म की आंतरिक खोज एक विस्तृत रचनात्मक संसार के
रूप में सामने आते हैं। उनकी आगामी एकल प्रदर्शनी इस संसार से रूबरू होने का अवसर
देगी।
-डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज










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